उमराह गाइड · ज़ायरीन के लिए
भारत से उड़ान भरने वालों के लिए मीक़ात और एहराम
हर ज़ायर को मीक़ात पार करने से पहले एहराम में होना ज़रूरी है। भारत से उड़ान भरते हुए आप हवा में ही मीक़ात पार करते हैं, आम तौर पर जद्दा में उतरने से पहले। यहाँ सही तरीका है, और यह भी कि पहले मदीना जाएँ तो क्या करें।
Labbyk संपादकीय टीम 4 मिनट में पढ़ें
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मीक़ात मक्का के चारों ओर वे हदें हैं जो नबी ﷺ ने तय कीं। उमराह या हज के लिए मक्का जाने वाले हर शख़्स को इन्हें पार करने से पहले एहराम में होना ज़रूरी है। ये पाँच हैं, हिजाज़ के हर पुराने रास्ते पर एक। फ़्लाइट से आने वाले ज़ायरीन यही हद हवा में पार करते हैं।
पाँचों मीक़ात
| मीक़ात | आज की जगह | मक्का से दूरी | किनके लिए |
|---|---|---|---|
| ज़ुल-हुलैफ़ा | अबयार-ए-अली, मदीना | लगभग 420 किमी | मदीना से आने वाले |
| जुह्फ़ा | राबिग़ के पास | लगभग 180 किमी | मिस्र, शाम और उत्तर-पश्चिम |
| क़र्न-उल-मनाज़िल | अस-सैल अल-कबीर, ताइफ़ के पास | लगभग 80 किमी | नज्द, रियाद और पूरब |
| यलमलम | अस-सादिया | लगभग 100 किमी | यमन और दक्षिण — और भारत से बहुत-सी फ़्लाइटें |
| ज़ात-ए-इर्क़ | मक्का के उत्तर-पूर्व में | लगभग 90 किमी | इराक़ और उत्तर-पूर्व |
दूरियाँ सड़क के हिसाब से अंदाज़न हैं। जद्दा मीक़ात की हद के अंदर है, इसलिए उलमा की भारी अक्सरियत के नज़दीक बाहर से आने वालों के लिए यह ख़ुद मीक़ात नहीं।
भारत से उड़ान: एहराम कब बाँधें
भारत के शहरों से जद्दा आने वाली फ़्लाइटें जहाज़ के नीचे उतरना शुरू करने से पहले यलमलम और क़र्न-उल-मनाज़िल के बीच की लाइन पार करती हैं। ज़्यादातर एयरलाइंस ऐलान करती हैं — आम तौर पर मीक़ात से 20 से 40 मिनट पहले — लेकिन सिर्फ़ ऐलान पर भरोसा न करें; शक हो तो क्रू से पूछ लें।
घर या एयरपोर्ट पर तैयारी
ग़ुस्ल करें, नाख़ून काटें, और घर से निकलने से पहले या एयरपोर्ट पर चढ़ने से पहले एहराम का लिबास पहन लें। जहाज़ के टॉयलेट में कपड़े बदलना मुश्किल होता है। अगर फ़्लाइट दुबई, दोहा या कहीं और से होकर जाए तो ठहराव के दौरान भी बदल सकते हैं।
अभी नियत न करें
सिर्फ़ लिबास पहनने से आप एहराम में नहीं आते। नियत से पहले एहराम की कोई पाबंदी लागू नहीं — आप बिना ख़ुशबू की चीज़ें इस्तेमाल कर सकते हैं और सीट पर आम तरीक़े से नमाज़ पढ़ सकते हैं।
मीक़ात से पहले नियत करें
जब क्रू मीक़ात का ऐलान करे — या एहतियातन कुछ पहले — दिल में नियत करें और «लब्बैक अल्लाहुम्मा उमरतन» (हज के लिए «हज्जन») कहें। अब आप एहराम में हैं।
तल्बिया शुरू करें
तल्बिया पढ़ें — मर्द ऊँची आवाज़ में लेकिन दूसरे मुसाफ़िरों को परेशान किए बिना, औरतें धीरे — और काबा पहुँचकर तवाफ़ शुरू होने तक दोहराते रहें।
पहले मदीना जा रहे हैं?
भारत से बहुत-से पैकेज पहले मदीना पहुँचते हैं और बाद में मक्का जाते हैं। अगर जहाज़ मदीना उतरे तो फ़्लाइट में एहराम की ज़रूरत नहीं, क्योंकि मदीना मीक़ात से बाहर है। बाद में जब मदीना से मक्का जाएँ तो शहर के किनारे ज़ुल-हुलैफ़ा (मस्जिद अबयार-ए-अली) पर एहराम बाँधें। ज़्यादातर ग्रुप निकलते हुए वहाँ रुकते हैं, या होटल में एहराम पहनकर बस या हरमैन ट्रेन के मीक़ात से गुज़रते समय नियत करते हैं।
मर्दों और औरतों का एहराम
- मर्द दो बिना सिली सफ़ेद चादरें पहनते हैं — कमर पर इज़ार और कंधों पर रिदा — और सिर खुला रखते हैं। चप्पल या सैंडल ऐसी हो कि पैर का ऊपरी हिस्सा और टख़ने खुले रहें। इज़ार सँभालने के लिए बेल्ट या पैसों की थैली जायज़ है।
- औरतों का कोई ख़ास एहरामी लिबास नहीं। वे चेहरे और हाथों के सिवा सब कुछ ढकने वाला कोई भी ढीला पर्दे वाला लिबास, किसी भी रंग में पहनती हैं। एहराम में औरत नक़ाब और दस्ताने नहीं पहनती, लेकिन ग़ैर-मर्द पास हों तो चेहरे पर कपड़ा लटका सकती है।
- बच्चे भी एहराम बाँध सकते हैं और उनका उमराह या हज सही है, हालाँकि यह बालिग़ होने के बाद के फ़र्ज़ हज की जगह नहीं लेता।
एहराम के नियम
नियत करने के बाद ये पाबंदियाँ उमराह में बाल कटवाने तक, या हज में 10 ज़िल-हिज्जा तक लागू रहती हैं:
मना है
- बाल या नाख़ून काटना
- ख़ुशबू, और ख़ुशबूदार साबुन, शैम्पू या लोशन
- मर्द: सिर ढकना और सिला हुआ, जिस्म के नाप का कपड़ा
- औरतें: नक़ाब और दस्ताने
- मियाँ-बीवी का ताल्लुक़, और निकाह
- शिकार, झगड़ा और बदज़बानी
जायज़ है
- बिना ख़ुशबू के साबुन से नहाना
- साफ़ एहराम बदलना
- बेल्ट, घड़ी, चश्मा और सुनने की मशीन
- छतरी, जहाज़ में कंबल
- दवाइयाँ और पट्टियाँ
- दाँत साफ़ करना
इसके बाद हमारी उमराह की स्टेप-बाय-स्टेप गाइड के मुताबिक़ चलें, मस्जिद-ए-हराम में दाख़िले से बाल कटवाने तक।
