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उमराह गाइड · ज़ायरीन के लिए

उमराह का तरीका, स्टेप-बाय-स्टेप

उमराह के चार अरकान हैं: एहराम, तवाफ़, सई और बाल कटवाना। यह गाइड हर रुक्न को उसी क्रम में समझाती है जिसमें आप उसे अदा करेंगे — तवाफ़ और सई के चित्रों, अरबी दुआओं और ज़ायरीन की सबसे आम ग़लतियों के साथ।

Labbyk संपादकीय टीम 12 मिनट में पढ़ें

Pilgrims in ihram performing tawaf around the Kaaba
इस पेज पर
  1. 1सफ़र से पहले
  2. 2स्टेप 1: मीक़ात पर एहराम
  3. 3स्टेप 2: तवाफ़ — काबा के सात चक्कर
  4. 4स्टेप 3: सफ़ा और मरवा की सई
  5. 5स्टेप 4: हल्क़ या क़स्र — बाल कटवाना
  6. 6उमराह के बाद: मदीना और ज़ियारत
  7. 7आम ग़लतियाँ जिनसे बचें

उमराह मक्का मुकर्रमा की छोटी ज़ियारत है। हज के विपरीत इसे साल में कभी भी किया जा सकता है, और भीड़ के हिसाब से इसके अरकान आम तौर पर तीन से पाँच घंटे में पूरे हो जाते हैं। ये चार हैं, और हमेशा इसी क्रम में:

  1. स्टेप 1एहराममीक़ात पर बाँधें
  2. स्टेप 2तवाफ़काबा के सात चक्कर
  3. स्टेप 3सईसफ़ा से मरवा, सात चक्कर
  4. स्टेप 4हल्क़ या क़स्रबाल मुँडवाएँ या कटवाएँ
चित्र 1 · उमराह के चार अरकान, उसी क्रम में जिसमें आप इन्हें अदा करते हैं।

सफ़र से पहले

  • वीज़ा: आपको उमराह वीज़ा (आम तौर पर एजेंसी बनवाती है) या कोई और सऊदी वीज़ा चाहिए जिस पर उमराह की इजाज़त हो। एजेंसी बताएगी कि कौन से दस्तावेज़ चाहिए और कितना समय लगेगा।
  • वैक्सीन: सऊदी अरब उमराह ज़ायरीन से मेनिनजाइटिस (ACWY) वैक्सीन का सर्टिफ़िकेट माँगता है। सेहत के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए रवानगी से पहले एजेंसी से मौजूदा सूची पूछ लें।
  • नुसुक ऐप: सऊदी हज और उमराह मंत्रालय का आधिकारिक ऐप। मदीना में रियाज़ुल जन्नह में नमाज़ का समय और दूसरे परमिट इसी से बुक होते हैं।
  • जो दुआएँ माँगनी हैं, तैयार रखें। तवाफ़ के हर चक्कर या सई के हर फेरे की कोई तय दुआ नहीं है। आप अपनी भाषा में दुआ कर सकते हैं, इसलिए अपने लिए और उन सबके लिए जिन्होंने दुआ की गुज़ारिश की है, एक सूची बना लें।
  • दिल साफ़ कर लें। सफ़र सिर्फ़ अल्लाह के लिए हो, जहाँ तक हो सके क़र्ज़ चुका दें, और रवाना होने से पहले जिसका दिल दुखाया हो उससे माफ़ी माँग लें।
  • अरकान पहले से सीख लें, इस गाइड से या एजेंसी के रवानगी से पहले के ट्रेनिंग सेशन से, ताकि उस दिन आपका ध्यान इबादत पर रहे, अगले स्टेप की फ़िक्र पर नहीं।

स्टेप 1: मीक़ात पर एहराम

एहराम वह पाक हालत है जिसमें आप उमराह के लिए दाख़िल होते हैं, और मर्दों के उस लिबास का नाम भी जो इस हालत में पहना जाता है। मक्का के चारों ओर की हद यानी मीक़ात पार करने से पहले एहराम बाँधना ज़रूरी है। भारत से उड़ान भरने वाले ज़ायरीन हवा में ही मीक़ात पार करते हैं, इसलिए ज़्यादातर लोग जहाज़ में चढ़ने से पहले एहराम का लिबास पहन लेते हैं — देखें भारत से जाने वालों के लिए मीक़ात और एहराम।

जिस्म की तैयारी

एहराम से पहले ग़ुस्ल करना, नाख़ून काटना और ग़ैर-ज़रूरी बाल साफ़ करना सुन्नत है। मर्द नियत से पहले बदन पर ख़ुशबू लगा सकते हैं — एहराम की चादर पर नहीं।

क्या पहनें

  • मर्द दो सादी, बिना सिली सफ़ेद चादरें पहनते हैं: एक कमर पर लपेटी जाती है (इज़ार) और एक कंधों पर (रिदा)। सिर खुला रहता है, और जूता ऐसा हो कि पैर का ऊपरी हिस्सा और टख़ने खुले रहें।
  • औरतें अपना आम पर्दे वाला लिबास किसी भी रंग में पहनती हैं जो चेहरे और हाथों के सिवा सब कुछ ढक ले। एहराम में औरत नक़ाब और दस्ताने नहीं पहनती।

नियत करें और तल्बिया पढ़ें

अगर मकरूह वक़्त न हो तो बहुत से उलमा पहले दो रकअत पढ़ने की सलाह देते हैं। फिर मीक़ात पर या उससे पहले दिल में उमराह की नियत करें और कहें «लब्बैक अल्लाहुम्मा उमरतन» — «हाज़िर हूँ ऐ अल्लाह, उमराह के लिए»। इसी पल से आप एहराम में हैं। फिर तल्बिया शुरू करें: मर्द ऊँची आवाज़ में, औरतें धीरे, और हर शख़्स अलग-अलग — किसी लीडर के पीछे मिलकर नहीं। मक्का के रास्ते में तवाफ़ शुरू होने तक इसे दोहराते रहें।

तल्बिया

لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ، لَبَّيْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ، إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَةَ لَكَ وَالْمُلْكَ، لَا شَرِيكَ لَكَ

लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक, लब्बैक ला शरीका लका लब्बैक। इन्नल-हम्दा वन-निअमता लका वल-मुल्क, ला शरीका लक।

हाज़िर हूँ ऐ अल्लाह, हाज़िर हूँ। हाज़िर हूँ, तेरा कोई शरीक नहीं, हाज़िर हूँ। बेशक सारी तारीफ़ और सारी नेमत तेरी है, और बादशाही भी। तेरा कोई शरीक नहीं।

एहराम में क्या जायज़ है और क्या नहीं

एहराम में मना

  • बाल या नाख़ून काटना या उखाड़ना
  • ख़ुशबू, या ख़ुशबूदार साबुन और क्रीम लगाना
  • मर्द: सिर ढकना, या जिस्म के नाप पर सिला कपड़ा पहनना
  • औरतें: नक़ाब से चेहरा ढकना, या दस्ताने पहनना
  • मियाँ-बीवी का ताल्लुक़, और निकाह करना या उसमें शामिल होना
  • शिकार, और झगड़ा या बदज़बानी

एहराम में जायज़

  • बिना ख़ुशबू के साबुन से नहाना
  • एहराम का साफ़ जोड़ा बदलना
  • बेल्ट या पैसों की थैली, घड़ी और चश्मा
  • छतरी, और बस में या छत के नीचे बैठना
  • दवाइयाँ लेना
  • दाँत साफ़ करना

स्टेप 2: तवाफ़ — काबा के सात चक्कर

मक्का पहुँचकर होटल में सामान रखें, वुज़ू करें और मस्जिद-ए-हराम जाएँ। दायाँ पैर पहले रखकर दाख़िल हों और मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ पढ़ें। तवाफ़ के लिए वुज़ू ज़रूरी है; अगर चक्करों के दौरान वुज़ू टूट जाए तो दोबारा वुज़ू करके वहीं से जारी रखें जहाँ रुके थे।

मस्जिद में दाख़िल होते समय

بِسْمِ اللَّهِ، وَالصَّلَاةُ وَالسَّلَامُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ

बिस्मिल्लाह, वस्सलातु वस्सलामु अला रसूलिल्लाह। अल्लाहुम्मफ़्तह ली अबवाबा रहमतिक।

अल्लाह के नाम से, और दुरूद व सलाम हो अल्लाह के रसूल पर। ऐ अल्लाह, मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।

जब पहली बार काबा नज़र आए तो एक पल रुक जाएँ। बहुत से ज़ायरीन यहाँ हाथ उठाकर अपनी सबसे अहम ज़रूरतों के लिए दुआ करते हैं, फिर मताफ़ की ओर बढ़ते हैं।

तवाफ़ का नक्शा: बीच में काबा, हज्र-ए-असवद, दरवाज़ा, रुक्न-ए-यमानी, हतीम और मक़ाम-ए-इब्राहीम, और हज्र-ए-असवद की लाइन से घड़ी की उल्टी दिशा में घूमते तीर।शुरुआत की लाइनहरी बत्तीहतीमदरवाज़ाकाबाहज्र-ए-असवदकाला पत्थररुक्न-ए-यमानीयमनी कोनामक़ाम-ए-इब्राहीमइसके पीछे दो रकअत× 7 चक्करघड़ी की उल्टी दिशा में चलें, काबा बाईं ओर रहे
चित्र 2 · ऊपर से तवाफ़: हज्र-ए-असवद की सीध से शुरू करें और घड़ी की उल्टी दिशा में चलें, काबा बाईं ओर रहे और हतीम आपके घेरे के अंदर।
  1. दायाँ कंधा खोलें (मर्द)

    मर्द ऊपर की चादर दाईं बग़ल के नीचे से निकालकर बाएँ कंधे पर डालें (इज़्तिबा)। यह सिर्फ़ उमराह के तवाफ़ में है; सातों चक्कर पूरे होने पर कंधा फिर ढक लें।

  2. हज्र-ए-असवद से शुरू करें

    हज्र-ए-असवद की सीध में खड़े हों — उसके सामने मस्जिद की दीवार पर लगी हरी बत्ती यह लाइन बताती है। तल्बिया बंद कर दें। हज्र-ए-असवद की ओर मुँह करें, दायाँ हाथ उसकी ओर उठाएँ और कहें «बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर»। उसे चूमना या छूना सुन्नत है, लेकिन भीड़ में इशारा करना काफ़ी है।

  3. घड़ी की उल्टी दिशा में सात चक्कर

    काबा बाईं ओर रखें। हर चक्कर हज्र-ए-असवद से हज्र-ए-असवद तक है। हतीम की गोल दीवार के बाहर से चलें: वह काबा का हिस्सा है, उसके अंदर से गुज़रने वाला चक्कर नहीं गिना जाता।

  4. पहले तीन चक्करों में तेज़ चलें (मर्द)

    जगह हो तो मर्द पहले तीन चक्कर छोटे, तेज़ क़दमों से चलें (रमल), फिर बाक़ी चार आम रफ़्तार से। इसके लिए भीड़ में धक्का-मुक्की न करें।

  5. रुक्न-ए-यमानी पर

    रुक्न-ए-यमानी तक हाथ आसानी से पहुँचे तो दाएँ हाथ से छू लें। उसे न चूमें, और दूर से इशारा भी न करें। इस कोने और हज्र-ए-असवद के बीच «रब्बना आतिना…» पढ़ें (नीचे देखें)।

  6. अपनी दुआ ख़ुद माँगें

    रुक्न-ए-यमानी और हज्र-ए-असवद के बीच «रब्बना आतिना» के सिवा हर चक्कर की कोई तय दुआ नहीं, और न किसी लीडर के पीछे किताब से दुआएँ दोहराने की ज़रूरत है। अपने शब्दों में, किसी भी भाषा में अल्लाह से बात करें, क़ुरआन पढ़ें और ज़िक्र करें।

  7. दो रकअत नमाज़

    सातवें चक्कर के बाद कंधा ढकें और जगह हो तो मक़ाम-ए-इब्राहीम के पीछे, वरना मस्जिद में कहीं भी दो रकअत पढ़ें। पहली रकअत में सूरह अल-काफ़िरून और दूसरी में सूरह अल-इख़्लास पढ़ना सुन्नत है।

  8. ज़मज़म पिएँ

    ज़मज़म पिएँ जो मस्जिद में हर तरफ़ मिलता है, और दुआ करें। बहुत से ज़ायरीन मुल्तज़म — हज्र-ए-असवद और दरवाज़े के बीच की दीवार — तक पहुँच सकें तो वहाँ भी दुआ करते हैं।

रुक्न-ए-यमानी और हज्र-ए-असवद के बीच

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतंव-व फ़िल-आख़िरति हसनतंव-व क़िना अज़ाबन्नार।

ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा। (क़ुरआन 2:201)

ज़मज़म पीते समय

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا وَاسِعًا، وَشِفَاءً مِنْ كُلِّ دَاءٍ

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका इल्मन नाफ़िआ, व रिज़्क़न वासिआ, व शिफ़ाअन मिन कुल्लि दा।

ऐ अल्लाह, मैं तुझसे फ़ायदा देने वाला इल्म, कुशादा रोज़ी और हर बीमारी से शिफ़ा माँगता हूँ। (हज़रत इब्ने अब्बास ज़मज़म पीते समय यह पढ़ते थे; जो चाहें दुआ करें।)

स्टेप 3: सफ़ा और मरवा की सई

सई हज़रत इस्माईल की वालिदा हज़रत हाजरा की याद है, जो पानी की तलाश में दोनों पहाड़ियों के बीच दौड़ी थीं। आज दोनों पहाड़ियाँ मस्जिद के अंदर हैं और एक लंबी एयर-कंडीशंड गैलरी से जुड़ी हैं। हर फेरा लगभग 450 मीटर का है, यानी सातों फेरे क़रीब तीन किलोमीटर बनते हैं। सई के लिए वुज़ू मुस्तहब है, ज़रूरी नहीं।

सई का नक्शा: ऊपर सफ़ा और नीचे मरवा के बीच सात चक्कर, सफ़ा से शुरू और मरवा पर ख़त्म, बीच में हरी बत्तियों वाला हिस्सा।सफ़ामरवायहाँ से शुरू करेंसातवें चक्कर के बाद यहाँ ख़त्महरी बत्तियाँमर्द तेज़ चलें≈ 450 मीटर हर तरफ़1234567
चित्र 3 · सई: सात फेरे, सफ़ा से शुरू और मरवा पर ख़त्म। सफ़ा से मरवा एक फेरा है और मरवा से वापस सफ़ा दूसरा।
  1. सफ़ा पर चढ़ें

    पहले फेरे की शुरुआत में सफ़ा के पास पहुँचकर नीचे दी गई आयत पढ़ें और कहें «अब्दउ बिमा बदअल्लाहु बिही» — «मैं वहीं से शुरू करता हूँ जहाँ से अल्लाह ने शुरू किया»।

  2. काबा की ओर मुँह करके दुआ

    सफ़ा पर काबा की ओर मुँह करें, हाथ उठाएँ, तीन बार «अल्लाहु अकबर» कहें, फिर नीचे दिया गया ज़िक्र पढ़ें और अपनी दुआ माँगें।

  3. मरवा तक चलें — यह पहला फेरा है

    मर्द दीवारों और छत पर लगी दो हरी बत्तियों के बीच तेज़ चलें; औरतें पूरे रास्ते आम रफ़्तार से। मरवा पर काबा की ओर मुँह करके वही ज़िक्र और दुआ दोहराएँ।

  4. मरवा से वापस सफ़ा — दूसरा फेरा

    इसी तरह जारी रखें। विषम फेरे मरवा पर ख़त्म होते हैं और सम फेरे सफ़ा पर।

  5. चलते हुए दुआ जारी रखें

    दोनों पहाड़ियों के बीच दुआ करें, क़ुरआन पढ़ें या अल्लाह का ज़िक्र करें — सई का कोई हिस्सा ऐसा नहीं जहाँ दुआ रुक जाए।

  6. मरवा पर ख़त्म

    सातवाँ फेरा मरवा पर ख़त्म होता है। सई के बाद कोई नमाज़ नहीं है।

सफ़ा के पास पहुँचकर

إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ مِنْ شَعَائِرِ اللَّهِ — أَبْدَأُ بِمَا بَدَأَ اللَّهُ بِهِ

इन्नस-सफ़ा वल-मरवता मिन शआइरिल्लाह। अब्दउ बिमा बदअल्लाहु बिही।

बेशक सफ़ा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं (क़ुरआन 2:158)। मैं वहीं से शुरू करता हूँ जहाँ से अल्लाह ने शुरू किया।

सफ़ा और मरवा पर

لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ، أَنْجَزَ وَعْدَهُ، وَنَصَرَ عَبْدَهُ، وَهَزَمَ الْأَحْزَابَ وَحْدَهُ

ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लह, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर। ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदह, अंजज़ा वअदह, व नसरा अब्दह, व हज़मल-अहज़ाबा वहदह।

अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं; बादशाही उसी की है और तारीफ़ उसी की, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है; उसने अपना वादा पूरा किया, अपने बंदे की मदद की, और अकेले ही लश्करों को हराया।

स्टेप 4: हल्क़ या क़स्र — बाल कटवाना

आख़िरी रुक्न बाल कटवाना है, जिससे एहराम ख़त्म होता है। मर्द या तो पूरा सिर मुँडवाएँ (हल्क़) जो अफ़ज़ल है, या पूरे सिर के बाल बराबर छोटे करवाएँ (क़स्र) — एक तरफ़ से कुछ बाल काटना काफ़ी नहीं। औरतें अपने बाल समेटकर सिरे से लगभग एक पोर के बराबर (2 से 3 सेंटीमीटर) काटें, पर्दे में।

मुँडवाने का सवाब ज़्यादा है: नबी ﷺ ने सिर मुँडवाने वालों के लिए तीन बार रहमत की दुआ की, फिर बाल छोटे कराने वालों के लिए (बुख़ारी, मुस्लिम)। मरवा के पास मस्जिद के बाहर ही नाई मौजूद हैं। बाल कटते ही एहराम की सारी पाबंदियाँ ख़त्म हो जाती हैं, और आपका उमराह पूरा हो गया। अल्हम्दुलिल्लाह।

उमराह पूरा होने पर

رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ

रब्बना तक़ब्बल मिन्ना, इन्नका अंतस-समीउल-अलीम।

ऐ हमारे रब, हमसे क़बूल फ़रमा। बेशक तू ही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। (क़ुरआन 2:127)

उमराह के बाद: मदीना और ज़ियारत

मदीना की हाज़िरी उमराह का हिस्सा नहीं है, लेकिन लगभग हर ग्रुप वहाँ कुछ दिन बिताता है। यह एक अलग इबादत है: आप नबी ﷺ की मस्जिद में नमाज़ के लिए सफ़र करते हैं, जहाँ एक नमाज़ मस्जिद-ए-हराम के सिवा दूसरी जगहों की हज़ार नमाज़ों से बेहतर है (बुख़ारी, मुस्लिम)।

  • रियाज़ुल जन्नह, नबी ﷺ के घर और मिंबर के बीच, «जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़» है। दाख़िला नुसुक ऐप में समय बुक करके होता है — स्लॉट जल्दी भर जाते हैं, इसलिए तारीख़ें तय होते ही बुक कर लें।
  • रौज़ा-ए-मुबारक पर आराम से गुज़रते हुए कहें «अस्सलामु अलैका या रसूलल्लाह», फिर हज़रत अबू बक्र और हज़रत उमर को सलाम करें। दुआ अल्लाह ही से, क़िब्ला-रुख़ होकर माँगी जाती है।
  • मस्जिद-ए-क़ुबा: होटल से वुज़ू करके जाएँ और वहाँ दो रकअत पढ़ें — नबी ﷺ ने फ़रमाया इसका सवाब एक उमराह के बराबर है (इब्ने माजा, तिर्मिज़ी)।
  • जन्नतुल बक़ी और उहुद: सहाबा की क़ब्रों और शुहदा-ए-उहुद की ज़ियारत करें और उनके लिए दुआ करें।
  • ख़रीदारी एक दोपहर तक सीमित रखें, ताकि बाज़ार वे दिन न ले जाए जिनके लिए आप आए हैं।

ज़्यादातर पैकेजों में मक्का और मदीना की ज़ियारत भी शामिल होती है: जबल-ए-नूर, अरफ़ात, मस्जिद-ए-क़ुबा, उहुद और मस्जिद-ए-क़िब्लतैन। उमराह पैकेज में आम तौर पर क्या शामिल होता है, यहाँ देखें।

आम ग़लतियाँ जिनसे बचें

  • सीधे मक्का जाते हुए बिना एहराम के जद्दा उतरना — मीक़ात हवा में ही पार हो जाता है।
  • तवाफ़ में हतीम के अंदर से गुज़रना, जिससे वह चक्कर अधूरा रह जाता है।
  • हज्र-ए-असवद की लाइन से हटकर तवाफ़ शुरू करना, या अधूरे चक्कर को पूरा गिन लेना।
  • रुक्न-ए-यमानी को चूमना या उसकी ओर इशारा करना — हाथ पहुँचे तो सिर्फ़ छुआ जाता है।
  • सई मरवा से शुरू करना, या सफ़ा से मरवा और वापसी को एक ही फेरा गिनना।
  • पूरे सिर के बाल बराबर छोटे करने के बजाय एक तरफ़ से कुछ बाल काट लेना।
  • तवाफ़ की दुआएँ किसी लीडर के पीछे इतनी ऊँची आवाज़ में मिलकर पढ़ना कि दूसरों को परेशानी हो — अपनी दुआ ख़ुद माँगना सुन्नत है।
  • एहराम ख़त्म करने वाले बाल कटवाने से पहले ख़ुशबूदार साबुन, वाइप्स या इत्र लगाना।
  • हज्र-ए-असवद तक पहुँचने के लिए दूसरों को धक्का देना या तकलीफ़ पहुँचाना। उसे चूमना सुन्नत है; लोगों को तकलीफ़ न देना फ़र्ज़ है।

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